एक बड़ी ‘रोचक-सोचक’ सी जानकारी आज सामने आई। जो जानकार हैं, वे तो इस बारे में जानते ही होंगे लेकिन शायद बहुत से और लोग…
View More ‘राजमा-चावल’ भारी तो होता है, लेकिन हम उसके आभारी भी हो सकते हैं!Author: Neelesh Dwivedi
शिवाजी ‘महाराज’ : तान्हाजीराव मालुसरे बोल उठे, “महाराज, कोंढाणा किले को में जीत लूँगा”
महाराज ने औरंगजेब के खिलाफ युद्ध छेड़ने का फैसला किया। राजधानी के सामने सिर्फ छह कोस की दूरी पर था कोंढाणा उर्फ सिंहगढ़। सबसे पहले…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : तान्हाजीराव मालुसरे बोल उठे, “महाराज, कोंढाणा किले को में जीत लूँगा”कुछ पल फुर्सत के निकालकर देखिए, सामने नई सृष्टि खुलने लगेगी
फुर्सत के पलों को फालतू की वक्त-बर्बादी समझने की गलती मत कीजिएगा। अलबत्ता कई बार कुछ लोग ऐसा करते भी होंगे। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं…
View More कुछ पल फुर्सत के निकालकर देखिए, सामने नई सृष्टि खुलने लगेगीशिवाजी ‘महाराज’ : औरंगजेब की जुल्म-जबर्दस्ती खबरें आ रही थीं, महाराज बैचैन थे
समूचे मुगल राजवंश में औरंगजेब-सा गुणी आदमी दूसरा कोई नहीं था। बाबर, अकबर, शाहजहान और दाराशिकोह वगैरा से उसका व्यक्तित्त्व कई मायनों में अधिक समृद्ध…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : औरंगजेब की जुल्म-जबर्दस्ती खबरें आ रही थीं, महाराज बैचैन थेशिवाजी ‘महाराज’ : जंजीरा का ‘अजेय’ किला मुस्लिम शासकों के कब्जे में कैसे आया?
महाराज आगरा से छूटकर आए और उन्होंने स्वराज्य की शासन-प्रणाली अधिक बलशाली, शास्त्रशुद्ध बनाई। जमीन के लगान की पद्धति, पैदल फौज तथा घुड़दल की संरचना…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : जंजीरा का ‘अजेय’ किला मुस्लिम शासकों के कब्जे में कैसे आया?शिवाजी ‘महाराज’ : चकमा शिवाजी राजे ने दिया और उसका बदला बादशाह नेताजी से लिया
महाराज के साथ आगरा गए सब लोग स्वराज्य में लौट आए। कवीन्द्र परमानन्द भी दौसा तक आ गए लेकिन वहाँ पर वे पकड़े गए। उन्हें…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : चकमा शिवाजी राजे ने दिया और उसका बदला बादशाह नेताजी से लियाशिवाजी ‘महाराज’ : कड़े पहरों को लाँघकर महाराज बाहर निकले, शेर मुक्त हो गया
महाराज औरंगजेब के जाल में फँस गए थे। महाराज के शिविर तथा उनके निजी खेमे में कड़ा पहरा था। खुद फौलाद खान ही दिन-रात वहाँ…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : कड़े पहरों को लाँघकर महाराज बाहर निकले, शेर मुक्त हो गयाशिवाजी ‘महाराज’ : “आप मेरी गर्दन काट दें, पर मैं बादशाह के सामने अब नहीं आऊँगा”
अपमानों की परिसीमा हुई और महाराज ऐन दरबार में भड़क उठे। यही जसवन्त सिंह मराठा सैनिकों से मात खाकर, उन्हें पीठ दिखाकर भाग खड़ा हुआ…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : “आप मेरी गर्दन काट दें, पर मैं बादशाह के सामने अब नहीं आऊँगा”शिवाजी ‘महाराज’ : शिवाजी की दहाड़ से जब औरंगजेब का दरबार दहल गया!
मुगल छावनी अब आराम फरमा सकती थी। खुद मिर्जा राजा भी रात को घड़ी दो घड़ी गंजिफा खेलने में मशगूल हो सकते थे। क्योंकि सन्धि…
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पुरन्दरगढ़ को जीतने की खातिर दिलेर खान ने लगातार दो महीने अथक मेहनत की। लेकिन बारूद के अजस्त्र भंडार, लक्षावधि रुपए और हजारों सैनिकों के…
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