Raigarh

शिवाजी ‘महाराज’ : रायगढ़ सज-धज कर शिवराज्याभिषेक की प्रतीक्षा कर रहा था

राजसभा के चबूतरे पर महाराज का सिंहासन था। नक्कारखाने से राजसभा में प्रवेश करते ही सामने शानदार ऊँचे चबूतरे पर यह चौकी दिखाई देती है।…

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Shivaji Raigarh

शिवाजी ‘महाराज’ : महाराष्ट्र का इन्द्रप्रस्थ साकार हो रहा था, महाराज स्वराज्य में मगन थे

रायगढ़ पर वेदमूर्ति गागाभट्ट तथा राजोपाध्याय अर्वीकर के मार्गदर्शन में राज्याभिषेक की पूर्व तैयारी शुरू हुई। गागाभट्ट तो बहुत ही कर्मठ थे। राज्याभिषेक के लिए…

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Alchohal, wine

विश्व स्वास्थ्य दिवस : दो-तीन पैग सेहत के लिए फायदेमन्द हैं….. ये ग़लत है!

आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। दुनियाभर में सेहत सम्बन्धी बातें हो रही हैं। सो, ख्याल आया कि डायरी पर भी इस मसले पर बात कर…

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Gagabhatt-Shivaji

शिवाजी ‘महाराज’ : राज्याभिषिक्त हों, सिंहानस्थ हों शिवबा

महाराज का सबसे चहेता और महत्त्वपूर्ण किला पन्हालगढ़ अभी स्वराज में वापिस नहीं आया था। महाराज को पन्हाला वापस लेने की तीव्र इच्छा थी। एक…

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Hanuman ji

भक्तों की भक्ति-कीर्तन परम्परा : हनुमान की जय, हो जय जय, हनुमान की जय

भक्त हनुमान की जयन्ती पर भक्ति भाव के साथ आस्थावान भक्तों का नृत्य। इस वीडियो को देखने के बाद शायद किसी को इससे मतलब हो…

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Chandravathi

‘मैंनूँ की’ सिद्धान्त पर चलने वालों को कर्नाटक की इन बुजुर्ग माँ से प्रेरणा लेनी चाहिए

कर्नाटक में मेंगलुरू के पास एक जगह है मंडारा। वहाँ रहती हैं 70 साल की बुजुर्ग चन्द्रावती जी। इन्हें इस बुधवार, पाँच अप्रैल को भारतीय…

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Samarth Ramdas-Shivaji

शिवाजी ‘महाराज’ : शिव-समर्थ भेंट हो गई, दो शिव-सागर एकरूप हुए

दिंडोरी की जीत के आठ ही दिन बाद मोरोपन्त पिंगले ने त्र्यम्बकगढ़ जीत लिया (दिनांक 25 अक्टूबर 1670)। अगले ही महीने (नवम्बर) में महाराज विदर्भ…

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Shivaji

शिवाजी ‘महाराज’ : दुःख से अकुलाकर महाराज बोले, ‘गढ़ आया, सिंह चला गया’

सिंहगढ़ तो हाथ आया लेकिन महाराज को अपने जानी दोस्त, सूबेदार तान्हाजीराव मालुसरे से हाथ धोना पड़ा। सूर्याजी के दुःख का पार नहीं था। उन्होंने…

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Happiness and Sorrow

दुखी इंसान की उम्र 10 साल कम हो जाती है, सो सुखी कैसे रहें फिनलैंड से सीखिए!

दुखी होना और रहना किसी बीमारी से ज्यादा खतरनाक होता है। ऐसा हाल ही सामने आए शोध अध्ययनों से साबित हुआ है। अमेरिका में ‘एजिंग…

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Tanaji Malusare

शिवाजी ‘महाराज’ : राजगढ़ में बैठे महाराज उछल पड़े, “मेरे सिंहों ने कोंढाणा जीत लिया”

माघ कृष्ण पक्ष नवमी। काली डरावनी आधी रात (दिनांक 4 फरवरी 1670)। आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे। झुरमुटों में झींगुर बोल रहे थे। सिंहगढ़…

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