पुणे के लालमहाल में जिजाऊ साहब और पश्चिमी महाराष्ट्र के पहाड़ी दर्रों में, मावल में, दादाजी पन्त की निगरानी में शिवाजी राजे पल रहे थे।…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : दुष्टों को सजा देने के लिए शिवाजी राजे अपनी सामर्थ्य बढ़ा रहे थेAuthor: Neelesh Dwivedi
शिवाजी ‘महाराज’ : आदिलशाही फौज ने पुणे को रौंद डाला था, पर अब भाग्य ने करवट ली थी
शिवाजी राजे शुक्ल पक्ष की चन्द्रलेखा की तरह बढ़ रहे थे। रामायण, महाभारत, शास्त्र-पुराण वह एकतानता से सुन रहे थे। महारुद्र हनुमानजी की शक्ति और…
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क्या आपको भी फरवरी में पसीना आ रहा हैं? अगर हाँ तो यह आपकी नहीं, बल्कि पर्यावरण की खराब सेहत का नतीज़ा है। यह महज…
View More पर्यावरण को ‘पाखंड’ से बचाइए, नहीं तो ‘फरवरी में मई’ सब पर भारी पड़ेगीशिवाजी ‘महाराज’ : “करे खाने को मोहताज… कहे तुका, भगवन्! अब तो नींद से जागो”
सह्याद्रि के माथे और तलहटी में फैला मावल का आँचल उफनते नदी-नालों तथा तुकाराम महाराज की तेजस्वी अभंगवाणी से सिंचित था। गुलामी एवं गँवारपन के…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : “करे खाने को मोहताज… कहे तुका, भगवन्! अब तो नींद से जागो”हम अँधेरे में जीवन का अर्थ टटोल रहे हैं… रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की कविता
…. तुम तो नदी की धारा के साथ दौड़ रहे हो। उस सुख को कैसे समझोगे, जो हमें नदी को देखकर मिलता है।और वह फूल…
View More हम अँधेरे में जीवन का अर्थ टटोल रहे हैं… रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की कविताशिवाजी ‘महाराज’ : शिवबा ने सूरज, सूरज ने शिवबा को देखा…पता नहीं कौन चकाचौंध हुआ
शिवाजी राजे शिवनेरी किले पर झूल रहे थे। झूला झुलाती जिजाऊ की आँखों में भी सतरंगी सपने झूल रहे थे। शिवबा की घुड़दौड़ के सीमोल्लंघन…
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बीजापुर के आदिलशाह ने कुछ ही समय में शहाजी राजे की स्वतंत्र रूप से राज करने की कोशिश नाकाम कर दी। रायाराव नामक सरदार को…
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लखुजी और शहाजी (श्वसुर-दामाद) में सदा के लिए मनमुटाव हो गया। वे एक-दूसरे के बैरी हो गए। लेकिन शहाजी राजे और जिजाऊ साहब में पहले…
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एक क़िस्सा दिखाता हूँ। हाँ, दिखाता ही हूँ। देखिए। मध्य प्रदेश के शहर भोपाल में ‘भारत-भवन’ का अंतरंग सभागार। खचाखच भरा हुआ। यहाँ तीन-चार सौ…
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शूर मराठा सरदार रिश्तों में बँधकर एक हो जाते। फिर भी आँखों पर पट्टी बाँधकर अँधेरे को बुलावा भेजते। और सभी उस अँधेरे में गिरते-पड़ते…
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