कुछ लोगों की आदत होती है कि वे अपने ही काम के प्रति बहुत संज़ीदा नहीं होते। उसे चलताऊ तरीक़े से किया करते हैं। इसलिए…
View More काम को संज़ीदगी से नहीं किया, तो समझो पत्ता साफ़?Tag: रोचक-सोचक
एक-दूसरे के साथ हमारी संगत या संगति कैसी हो, इस मिसाल से समझिए!
जिसे भी देखिए, वो अपने आप में ग़ुम है। ज़ुबाँ मिली है, मगर हमज़ुबाँ नहीं मिलता।। यह मशहूर शेर हम में अधिकांश लोगों की ज़िन्दगी की…
View More एक-दूसरे के साथ हमारी संगत या संगति कैसी हो, इस मिसाल से समझिए!ज़िन्दगी में ‘मूड’ नहीं, बल्कि हमारा ‘मूव’ मायने रखता है
हम अक्सर मूड को अपने ऊपर हावी पाते हैं। यानी जब मूड हुआ तो कोई काम करेंगे, और नहीं हुआ तो नहीं करेंगे। इससे हमेशा…
View More ज़िन्दगी में ‘मूड’ नहीं, बल्कि हमारा ‘मूव’ मायने रखता है,एक कविता….. ‘क़ातिल ऐशगाह!’
देर रात भूखे कुत्तों को पैकबंद फूड लिए घूमते हैं शफ़ीक़। वह बेक़सूर जानवरों के मुर्दा ज़िस्मों से बना होता है।।नेकी-पुण्य कमाने के लिए जो…
View More ,एक कविता….. ‘क़ातिल ऐशगाह!’यक़ीन दिलाता है तुम्हारा सजदा, कि…..!
यक़ीन दिलाता है तुम्हारा सजदा,कि जीत लिया तुमको मैंने, हरदम के लिए। अब नहीं रोक सकता मुझे कोई,मुक्ति की अपनी राह, ख़ुद चुनने के लिए।…
View More यक़ीन दिलाता है तुम्हारा सजदा, कि…..!संस्कृत की संस्कृति : “संस्कृत व्याकरण मानव मस्तिष्क की प्रतिभा का आश्चर्यतम नमूना!”
तो भगवान पाणिनि का बनाया हुआ ‘व्याकरण’ आधार के रूप में स्थापित होता चला गया। इसका कारण मात्र यह नहीं था कि व्याकरण के नियमों…
View More संस्कृत की संस्कृति : “संस्कृत व्याकरण मानव मस्तिष्क की प्रतिभा का आश्चर्यतम नमूना!”मध्य प्रदेश चुनाव का नतीजा साफ, यहाँ जानता हार रही है!
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए इसी 17 नवंबर को मतदान हो चुका है। आने वाली तीन दिसंबर को औपचारिक नतीज़ा भी आ जाएगा। लेकिन…
View More मध्य प्रदेश चुनाव का नतीजा साफ, यहाँ जानता हार रही है!‘संस्कृत की संस्कृति’ : आज की संस्कृत पाणिनि तक कैसे पहुँची?
पिछली कड़ी में हमने व्याकरण के आचार्यों का उल्लेख किया। संस्कृत वांग्मय में सभी विषयों का आदि अर्थात् सबसे पहले उपदेश करने वाले ब्रह्मा हैं।…
View More ‘संस्कृत की संस्कृति’ : आज की संस्कृत पाणिनि तक कैसे पहुँची?लुटियंस की दिल्ली में 2,000 का नोट बदलवाने वाले ‘लपकों की मौज़’
नई दिल्ली में मेट्रो की ‘यलो लाइन’ के पटेल चौक स्टेशन पर दोपहर को जैसे ही मैं उतरकर स्टेशन से बाहर निकला कि सामने से…
View More लुटियंस की दिल्ली में 2,000 का नोट बदलवाने वाले ‘लपकों की मौज़’जिसे प्रेम आता है, वह किसी का नहीं होता…. क्यूँ और कैसे? स्वामी ओमा से सुनिए!
ये हैं स्वामी ओमा द ‘अक्क’। ये श्रीराम पर बात करते हैं। श्रीकृष्ण पर बात करते हैं। तुलसी पर बात करते हैं। वेदव्यास पर बात…
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