जोतसोमा के घने जंगलों की अंतहीन टेढी-मेढ़ी राहों पर एक अजनबी आकृति उदास सी भटक रही थी। मानो वह जादू-टोने और भटकती आत्माओं की मायावी…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : खून से लथपथ ठोस बर्फीले गोले में तब्दील हो गई वहTag: सरोकार
होली जैसे त्यौहारों की धरोहर उसके मौलिक रूप में अगली पीढ़ी को सौंपें तो बेहतर!
पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक होते हैं। ये समाज की विविध मान्यताओं वा परम्पराओं को अभिव्यक्ति प्रदान करते हैं। इसी क्रम में हम बचपन से होली…
View More होली जैसे त्यौहारों की धरोहर उसके मौलिक रूप में अगली पीढ़ी को सौंपें तो बेहतर!जल संकट का हल छठवीं कक्षा की किताब में, कम से कम उसे ही पढ़ लें!
‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह कुछ और सोच पाता कि उसका भेजा उड़ गया
“अब तो ये दो हो गई हैं। सुना है कि वह बागी लड़की भी यहीं कहीं हैं।” “हमें उन दोनों को पकड़ना ही होगा। भले…
View More ‘मायावी अम्बा और शैतान’ : वह कुछ और सोच पाता कि उसका भेजा उड़ गयाबेंगलुरू में साल के छह महीने पानी बरसता है, फिर भी जल संकट क्यों?
मैं बेंगलुरू में रहता हूँ और मेरे स्नानघर में अब भी पर्याप्त पानी है। तो क्या बेंगलुरू में पानी के संकट से जुड़ी ख़बरें झूठी…
View More बेंगलुरू में साल के छह महीने पानी बरसता है, फिर भी जल संकट क्यों?No Smoking Day : Replace your cigarette with a glass of juice daily
“Cancer is no joke, So put down that smoke.” My article starts with this slogan today, because second Wednesday of March is celebrated as #NoSmokingDay…
View More No Smoking Day : Replace your cigarette with a glass of juice dailyधूम्रपान निषेध दिवस : अपने लिए खुशी या अपनों के लिए आँसू, फ़ैसला हमारा!
‘धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है’, ये वाक्य हमें हर गली-चौराहे और नशीली चीज़ों पर अक्सर लिखा हुआ दिखता है। हम सब जानते हैं, मानते…
View More धूम्रपान निषेध दिवस : अपने लिए खुशी या अपनों के लिए आँसू, फ़ैसला हमारा!यात्रा, मित्रता और ज्ञानवर्धन : कुछ मामलों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाकई अच्छा है
सुबह विद्यालय के लिए निकलती हूँ और सड़क पार करते ही एक पेड़ दिखता है…फूलों से लदा हुआ l बस आती नहीं दिखी तो मैं…
View More यात्रा, मित्रता और ज्ञानवर्धन : कुछ मामलों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट वाकई अच्छा हैमायावी अम्बा और शैतान : वे तो मारने ही आए थे, बात करने नहीं
गोलियों और संगीनों के साथ जब वे पहली बार उनके पीछे लगे, तभी से वह लोग भाग रहे थे। रुके नहीं थे। हालाँकि गोलियाँ उनकी…
View More मायावी अम्बा और शैतान : वे तो मारने ही आए थे, बात करने नहींअंग्रेजी से हमारा मोह : हम अब भी ग़ुलाम मानसिकता से बाहर नहीं आए हैं!
मैं जब ‘याहू’ में काम करता था, तो दक्षिण कोरिया में चार सदस्यों की मेरी टीम थी। उन चार सदस्यों में से‘ सिर्फ एक को…
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