Samarth Ramdas-Shivaji

शिवाजी ‘महाराज’ : शिव-समर्थ भेंट हो गई, दो शिव-सागर एकरूप हुए

दिंडोरी की जीत के आठ ही दिन बाद मोरोपन्त पिंगले ने त्र्यम्बकगढ़ जीत लिया (दिनांक 25 अक्टूबर 1670)। अगले ही महीने (नवम्बर) में महाराज विदर्भ…

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Shivaji

शिवाजी ‘महाराज’ : दुःख से अकुलाकर महाराज बोले, ‘गढ़ आया, सिंह चला गया’

सिंहगढ़ तो हाथ आया लेकिन महाराज को अपने जानी दोस्त, सूबेदार तान्हाजीराव मालुसरे से हाथ धोना पड़ा। सूर्याजी के दुःख का पार नहीं था। उन्होंने…

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Tanaji Malusare

शिवाजी ‘महाराज’ : राजगढ़ में बैठे महाराज उछल पड़े, “मेरे सिंहों ने कोंढाणा जीत लिया”

माघ कृष्ण पक्ष नवमी। काली डरावनी आधी रात (दिनांक 4 फरवरी 1670)। आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे। झुरमुटों में झींगुर बोल रहे थे। सिंहगढ़…

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Kondhana Fort

शिवाजी ‘महाराज’ : तान्हाजीराव मालुसरे बोल उठे, “महाराज, कोंढाणा किले को में जीत लूँगा”

महाराज ने औरंगजेब के खिलाफ युद्ध छेड़ने का फैसला किया। राजधानी के सामने सिर्फ छह कोस की दूरी पर था कोंढाणा उर्फ सिंहगढ़। सबसे पहले…

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Mughals-Atrocities

शिवाजी ‘महाराज’ : औरंगजेब की जुल्म-जबर्दस्ती खबरें आ रही थीं, महाराज बैचैन थे

समूचे मुगल राजवंश में औरंगजेब-सा गुणी आदमी दूसरा कोई नहीं था। बाबर, अकबर, शाहजहान और दाराशिकोह वगैरा से उसका व्यक्तित्त्व कई मायनों में अधिक समृद्ध…

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janjira-fort

शिवाजी ‘महाराज’ : जंजीरा का ‘अजेय’ किला मुस्लिम शासकों के कब्जे में कैसे आया?

महाराज आगरा से छूटकर आए और उन्होंने स्वराज्य की शासन-प्रणाली अधिक बलशाली, शास्त्रशुद्ध बनाई। जमीन के लगान की पद्धति, पैदल फौज तथा घुड़दल की संरचना…

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Netaji Palkhar

शिवाजी ‘महाराज’ : चकमा शिवाजी राजे ने दिया और उसका बदला बादशाह नेताजी से लिया

महाराज के साथ आगरा गए सब लोग स्वराज्य में लौट आए। कवीन्द्र परमानन्द भी दौसा तक आ गए लेकिन वहाँ पर वे पकड़े गए। उन्हें…

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Shivaji Escape

शिवाजी ‘महाराज’ : कड़े पहरों को लाँघकर महाराज बाहर निकले, शेर मुक्त हो गया

महाराज औरंगजेब के जाल में फँस गए थे। महाराज के शिविर तथा उनके निजी खेमे में कड़ा पहरा था। खुद फौलाद खान ही दिन-रात वहाँ…

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Auranzeb-Shivaji

शिवाजी ‘महाराज’ : “आप मेरी गर्दन काट दें, पर मैं बादशाह के सामने अब नहीं आऊँगा”

अपमानों की परिसीमा हुई और महाराज ऐन दरबार में भड़क उठे। यही जसवन्त सिंह मराठा सैनिकों से मात खाकर, उन्हें पीठ दिखाकर भाग खड़ा हुआ…

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Auranjeb-Shivaji

शिवाजी ‘महाराज’ : शिवाजी की दहाड़ से जब औरंगजेब का दरबार दहल गया!

मुगल छावनी अब आराम फरमा सकती थी। खुद मिर्जा राजा भी रात को घड़ी दो घड़ी गंजिफा खेलने में मशगूल हो सकते थे। क्योंकि सन्धि…

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