# उसे # “मर जाने दो उसे”, ये पहले शब्द थे, जो जन्म के समय उसके लिए निकाले गए। हमें पता है क्योंकि हम वहीं…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : “मर जाने दो इसे”, ये पहले शब्द थे, जो उसके लिए निकाले गएTag: सरोकार
‘मायावी अंबा और शैतान’ : मौत को जिंदगी से कहीं ज्यादा जगह चाहिए होती है!
अब तक वहाँ का माहौल ऐसा हो चुका था जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो। मगर वे लोग जिस प्राचीन ‘हबीशी’ जनजाति से ताल्लुक रखते…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : मौत को जिंदगी से कहीं ज्यादा जगह चाहिए होती है!मायावी अंबा और शैतान : “अरे ये लाशें हैं, लाशें… इन्हें कुछ महसूस नहीं होगा”
तभी तेज हवा का थपेड़ा अंबा के चेहरे से टकराया और उसके गले से होते हुए भीतर पेट तक उतर गया। इससे उसे ऐसा लगा…
View More मायावी अंबा और शैतान : “अरे ये लाशें हैं, लाशें… इन्हें कुछ महसूस नहीं होगा”‘मायावी अंबा और शैतान’ : वे लोग नहीं जानते थे कि प्रतिशोध उनका पीछा कर रहा है!
खून जमा देने वाली सर्दी में बर्फ पर चलते हुए तलाशी दस्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। सर्द हवा ऐसी चुभ रही थी, जैसे शरीर…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : वे लोग नहीं जानते थे कि प्रतिशोध उनका पीछा कर रहा है!‘मायावी अंबा और शैतान’ : जन्म लेना ही उसका पहला पागलपन था
वह छोटी बच्ची पूरी रात अपनी माँ को तलाशती रही। जोतसोमा के जंगल की बाड़ के पास पहुँचते ही उसकी साँसें थम गईं। एकाएक वह…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : जन्म लेना ही उसका पहला पागलपन थाअगर पेड़ भी चलते होते…. तो क्या होता? सुनिएगा!
अगर पेड़ भी चलते होतेअगर पेड़ भी चलते होतेकितने मज़े हमारे होतेबांध तने में उसके रस्सीचाहे जहाँ कहीं ले जाते जहाँ कहीं भी धूप सतातीउसके…
View More अगर पेड़ भी चलते होते…. तो क्या होता? सुनिएगा!हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम की
भारत भवन, भरत नाट्यम और श्रीराम की कथा। यह अद्भुत मेल बना 19 जून को। मौका था, ‘गोस्वामी तुलसीदास समारोह’ का। वैसे, भगवान श्रीराम के…
View More हम कथा सुनाते राम सकल गुणधाम कीदिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है… दिल के डॉक्टर को दिल ही धोख़ा दे गया, क्यों?
अभी दो रोज़ पहले एक ख़बर प्रमुखता से सुर्ख़ियों में आई। गुजरात के डॉक्टर गौरव गाँधी के बारे में। जामनगर के रहने वाले डॉक्टर गौरव…
View More दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है… दिल के डॉक्टर को दिल ही धोख़ा दे गया, क्यों?छोटे-छोटे बच्चे हाईपर-टेंशन के शिकार हो रहे हैं, उसके ज़िम्मेदार हम हैं!
अभी 17 मई को विश्व हाईपर-टेंशन दिवस था। हाईपर-टेंशन, मतलब किसी व्यक्ति में तनाव, चिन्ता आदि का वह स्तर कि उससे उसका ब्लड-प्रेशर बढ़ जाए।…
View More छोटे-छोटे बच्चे हाईपर-टेंशन के शिकार हो रहे हैं, उसके ज़िम्मेदार हम हैं!आज के ‘रैपर्स’ और उनके चाहने वालों को शास्त्रीय संगीत का ये ‘रैप’ ज़रूर सुनना चाहिए
मौज़ूदा दौर के संगीत की दुनिया में एक लोकप्रिय शैली हुआ करती है ‘रैप’। यानी जिसमें निश्चित लय पर कुछ बोल रखे जाते हैं। ये…
View More आज के ‘रैपर्स’ और उनके चाहने वालों को शास्त्रीय संगीत का ये ‘रैप’ ज़रूर सुनना चाहिए