शिवाजी राजे दयाशील थे। ममतालु थे। लेकिन कुछ मामलों में वज्र से भी कठोर थे। भोसलों की जागीर में एक गाँव था- राँझे। राँझे का…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : सह्याद्रि के कन्धों पर बसे किले ललकार रहे थे, “उठो बगावत करो” और…Category: चहेते पन्ने
लड़कियों को भी खुले आसमान में उड़ने का हक है, हम उनसे ये हक नहीं छीन सकते
“लैंगिक समानता” (gender equality)। हम इसका मतलब अक्सर ये निकाल लेते हैं कि महिला वह काम करे, जो पुरुष करते हैं। उनकी आदतों को अपना…
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पुणे के लालमहाल में जिजाऊ साहब और पश्चिमी महाराष्ट्र के पहाड़ी दर्रों में, मावल में, दादाजी पन्त की निगरानी में शिवाजी राजे पल रहे थे।…
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क्या आपको भी फरवरी में पसीना आ रहा हैं? अगर हाँ तो यह आपकी नहीं, बल्कि पर्यावरण की खराब सेहत का नतीज़ा है। यह महज…
View More पर्यावरण को ‘पाखंड’ से बचाइए, नहीं तो ‘फरवरी में मई’ सब पर भारी पड़ेगीहम अँधेरे में जीवन का अर्थ टटोल रहे हैं… रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की कविता
…. तुम तो नदी की धारा के साथ दौड़ रहे हो। उस सुख को कैसे समझोगे, जो हमें नदी को देखकर मिलता है।और वह फूल…
View More हम अँधेरे में जीवन का अर्थ टटोल रहे हैं… रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की कविताशिवाजी ‘महाराज’ : शिवबा ने सूरज, सूरज ने शिवबा को देखा…पता नहीं कौन चकाचौंध हुआ
शिवाजी राजे शिवनेरी किले पर झूल रहे थे। झूला झुलाती जिजाऊ की आँखों में भी सतरंगी सपने झूल रहे थे। शिवबा की घुड़दौड़ के सीमोल्लंघन…
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बीजापुर के आदिलशाह ने कुछ ही समय में शहाजी राजे की स्वतंत्र रूप से राज करने की कोशिश नाकाम कर दी। रायाराव नामक सरदार को…
View More शिवाजी ‘महाराज’ : रात के अंधियारे में शिवाजी का जन्म…. क्रान्ति हमेशा अँधेरे से अंकुरित होती हैकाँपते हाथों में बाँसुरी हिलती रहे और सुर थमे रहें, तो समझिए वे हाथ ‘हरि जी’ के हैं
एक क़िस्सा दिखाता हूँ। हाँ, दिखाता ही हूँ। देखिए। मध्य प्रदेश के शहर भोपाल में ‘भारत-भवन’ का अंतरंग सभागार। खचाखच भरा हुआ। यहाँ तीन-चार सौ…
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शूर मराठा सरदार रिश्तों में बँधकर एक हो जाते। फिर भी आँखों पर पट्टी बाँधकर अँधेरे को बुलावा भेजते। और सभी उस अँधेरे में गिरते-पड़ते…
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महाराष्ट्र के यादव राजाओं की राजधानी थी देवगिरि (आज का दौलताबाद, औरंगाबाद)। मराठों का गरुड़ध्वज देवगिरी पर शान से फहरा रहा था। यादव राजा अपने…
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