अख़बारों में अक्सर ही छपने वाली छोटी-छोटी कहानियों पर हम में से कितने लोग ध्यान देते हैं? शायद ही कुछ लोग देते हों। बावज़ूद इसके…
View More संवेदना : एक कहानी, गाय-बछड़े और दो चादर में छिपी भावनाओं कीCategory: चहेते पन्ने
हमारी सोच और ईश्वर का न्याय
अक्सर हम ईश्वर के न्याय पर सवाल उठाते हैं। हमारी यह मनोदशा खास तौर पर उस समय होती है, जब हमें लगता है कि हमारे…
View More हमारी सोच और ईश्वर का न्यायकिसी का पत्थर, किसी के लिए हीरा
कई बार कहा सुना गया है कि ‘हीरे की कीमत, जौहरी ही जानता है’। लेकिन क्या हमने इसी कहावत के दूसरे पहलुओं को भी जाना-समझा…
View More किसी का पत्थर, किसी के लिए हीराजीभ की उम्र लम्बी क्यों होती है?
जीभ की उम्र लम्बी क्यों होती है? बहुत प्रासंगिक और रोचक-सोचक सा सवाल है। ज़वाब सोचना चाहें तो सोच सकते हैं। अगर सुनना चाहें तो…
View More जीभ की उम्र लम्बी क्यों होती है?कुछ ऐसा कीजिए उपाय, सारी कड़वाहट दूर हो जाए
होली त्यौहार है रंग का, उमंग का। पर अगर दिलों में कड़वाहट घुली हो तो जीवन में न कोई उमंग रह जाती है, न रंग।…
View More कुछ ऐसा कीजिए उपाय, सारी कड़वाहट दूर हो जाएपानी की कहानी, पानी की ज़ुबानी : मैं जल… मैं कल… मुझे सुनिए… मैं घायल!
मैं, जल, आपका प्राण। मेरी एक घूँट में ही जन्नत का आराम मिलता है। जब आप मुझे पीते हैं तो पानी हो जाता हूँ। जब…
View More पानी की कहानी, पानी की ज़ुबानी : मैं जल… मैं कल… मुझे सुनिए… मैं घायल!आचार्य चार्वाक के मत का दूसरा नाम ‘लोकायत’ क्यों पड़ा?
भरत अपने ननिहाल से वापस अयोध्या पहुँचते हैं। अयोध्या में स्थितियाँ बहुत विकट थीं। एक तरफ राज सिंहासन प्रतीक्षा कर रहा था। दूसरी तरफ पिता की…
View More आचार्य चार्वाक के मत का दूसरा नाम ‘लोकायत’ क्यों पड़ा?पंडित रविशंकर, एक प्रेरक शख़्सियत, जिसने ‘ज़िन्दगी’ को थामा तो उसके मायने बदल दिए
पंडित रविशंकर आज 101 साल के हो गए। ऐसा इसलिए कहना ठीक है, क्योंकि उनके जैसे लोगों की सिर्फ़ देह ही दुनिया छोड़ती है। शख़्सियत…
View More पंडित रविशंकर, एक प्रेरक शख़्सियत, जिसने ‘ज़िन्दगी’ को थामा तो उसके मायने बदल दिएजयन्ती विशेषः अपने प्रिय कवि माखनलाल चतुर्वेदी की याद और पुष्प की अभिलाषा
आज फेसबुक स्क्रॉल करते हुए ‘डायरी’ की एक पोस्ट सामने आ गई। पोस्ट में एक सुन्दर तस्वीर पर माखनलाल चतुर्वेदी जी की कविता लिखी थी।…
View More जयन्ती विशेषः अपने प्रिय कवि माखनलाल चतुर्वेदी की याद और पुष्प की अभिलाषानिर्मल वर्मा की जयन्ती और एक प्रश्न, किताबों से बड़ा ज्ञान या ज्ञान से बड़ी किताबें?
किताबें ज्ञान का स्रोत हैं या फिर ज्ञान किताबों के सृजन का माध्यम? इस प्रश्न पर विचार का भरा-पूरा कारण दिया है इस कविता ने। प्रश्न के…
View More निर्मल वर्मा की जयन्ती और एक प्रश्न, किताबों से बड़ा ज्ञान या ज्ञान से बड़ी किताबें?