रंगपंचमी, सूखे रंग और कैनवास पर रंगोली!

मराठी संस्कृति वृहद और समृद्ध है। इसके कई अच्छे गुणों में संस्कार से लेकर खान-पान, पहनावा और घर परिवारों का रखरखाव भी महत्वपूर्ण है। इसके…

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चार्वाक हमें भूत-भविष्य के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं, पर क्या हम हो पाए हैं?

आचार्य चार्वाक बड़ी सुन्दर बात कहते हैं। उनकी बातें आज वर्तमान युग के एकदम अनुकूल हैं। बल्कि एक विचार तो यह भी हो सकता है कि वर्तमान बैंकिंग प्रणाली में प्रचलित…

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रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना…फिर याद आता उसे अपना कमरा

उजालों में अँधेरे देखने का आदी था वो। जब दुनिया जागती, उसे लगता कि अब सूरज ढला है। रातभर नदी के बहते पानी में पाँव डालकर बैठे रहना…फिर…

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मैं अगर चाय छोड़ सकता हूँ, तो यक़ीन करना चाहिए- कोई कुछ भी कर सकता है

चाय। चाय केवल इसीलिए नहीं पी जाती कि अच्छी लगती है। चाय पीने के और भी कई कारण हो सकते हैं। चाय आदर-सत्कार की अनिवार्य…

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अहो! भारत के तेज से युक्त यह होली दिख रही है..

जिस उम्र में लोग आधुनिकता और दुनियावी चमक-दमक के पीछे भागते हैं, उस उम्र में कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो संस्कृत और संस्कृति को…

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काश, चाँद की आभा भी नीली होती, सितारे भी और अंधेरा भी नीला हो जाता!

इसी गाढ़ी नीली दीवार के पीछे लटका है, माघ के शुक्ल पक्ष का चाँद, जो पूनम से होते हुए आज चौथ पर एक चौथाई कम हो गया…

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मैं 70-80 के दशक का बचपन हूँ…

ये लाइनें किसने लिखीं, पता नहीं। लेकिन जिसने भी लिखीं, क्या खूब और कितनी सच्ची लिखी हैं। दिल से लिखी हैं। सीधे दिल तक पहुँचती…

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परम् ब्रह्म को जानने, प्राप्त करने का क्रम कैसे शुरू हुआ होगा?

क्या है कि बहुत से मनुष्यों की प्रकृति बेचैन रहने की होती है। उनको कुछ ना कुछ चाहिए, जिसमें वे उलझे रहें। ऐसे ही कुछ लोगों…

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काश, ‘26 जनवरी वाले वे बड़े लोग’ इस बच्चे से रह जाते!

वीडियो में दिख रहा ये छोटा सा बच्चा दिल्ली के मयूर विहार स्थित रयान इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ता है। धैर्य जोशी नाम है इसका। इसी…

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‘हाँ’ कहना, ‘न’ कहने से बड़ा और चमत्कारी फलसफ़ा क्यों है?

हम सबने ‘न’ कहने की ताकत (Power of saying No) के बारे में सुना है। एक बार नहीं, कई बार और निश्चित रूप से ‘न’…

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