भारत-इंग्लैण्ड क्रिकेट श्रृंखला : आज जीते तो सिराज हैं, उस रोज जीतते तो भी सिराज होते!

कभी-कभी किसी व्यक्ति की भूमिका और उसकी किस्मत भी, कितनी महत्त्वपूर्ण हो जाती है, यह सोचने वाली बात है। ऐसा ‘कहने की कहानी’ शुरू होती है भारत और इंग्लैण्ड के बीच अभी-अभी खत्म हुई पाँच दिवसीय मैचों की श्रृंखला के तीसरे मैच से। लॉर्ड्स के मैदान पर खेले जा रहे मैच में भारत को जीत के लिए महज 193 रन बनाने थे। लेकिन इंग्लैण्ड की कसी गेंदबाजी ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए यह लक्ष्य भी मुश्किल कर दिया था। पाँचवें दिन मैच रोमांचक स्थिति में था। भारत के 147 रनों पर नौ विकेट गिर चुके थे। यद्यपि टेस्ट क्रिकेट में दुनिया के शीर्ष हरफनमौला खिलाड़ी रवीन्द्र जाडेजा एक छोर पर डटे थे। इससे भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद थी कि यदि दूसरे छोर पर आने वाला खिलाड़ी सिर्फ अपना विकेट बचा ले किसी तरह, तो जाडेजा मैच निकाल ले जाएँगे। तब तक 46 रन ही तो बनाने थे बस! पर्याप्त समय था। आराम-आराम से बन सकते थे। 

आखिरी बल्लेबाज के तौर पर आए मोहम्मद सिराज को भी जाडेजा ने यही समझाइश दी कि सिर्फ “अपना विकेट नहीं खोना, बाकी मैं सँभाल लूँगा।” सिराज भी ठहरे पक्के ‘टीम-प्लेयर’। उन्होंने हामी भरी और डट गए। खेलते-खेलते 29 गेंदें खेल लीं उन्होंने। भारतीय टीम जीत से महज 22 रन पीछे थी कि तभी किस्मत दगा दे गई। हाँ, सिराज को किस्मत दगा दे गई। कैसे? जवाब में नीचे वीडियो दिया गया है, देख सकते हैं। इंग्लैण्ड के फिरकी गेंदबाज बशीर की एक गेंद को सिराज ने धीरे से खेला। वह वहीं उनके पैरों के नीचे गिरी और जब तक वह कुछ समझते, गेंद लुढ़ककर विकेटों को छू गई। गिल्लियाँ गिर गईं। सिराज आउट हो गए। सिराज का दिल टूट गया। दुखी होकर वह वहीं जमीन पर बैठ गए। भारतीय टीम श्रृंखला में 2-1 से पिछड़ गई। 

हालाँकि, एक सच्चे संघर्षशील खिलाड़ी की तरह सिराज ने खुद को सँभाला और याद दिलाया कि श्रृंखला खत्म नहीं हुई है, दो मैच बाकी हैं। दिन बीते और चौथा टेस्ट मैच भारतीय बल्लेबाजों के शानदार प्रदर्शन की बदौलत बराबरी पर रहा।इसके बाद पाँचवाँ और निर्णायक आखिरी मैच। इसमें इंग्लैण्ड बराबरी भी कर लेता तो वह श्रृंखला जीत लेता। कारण कि आगे तो वह था ही। जाहिर तौर पर दबाव भारतीय टीम पर थोड़ा ज्यादा था। ओवल के मैदान पर खेले गए मैच के पाँचों दिन स्थितियाँ उतार-चढ़ाव भरी रहीं। कभी मौसम के कारण, तो कभी पिच की असमान परिस्थितियों की वजह से। फिर भी भारतीय टीम इंग्लैण्ड को चौथी पारी में 374 रन बनाने का मुश्किल लक्ष्य देने में सफल रही। इसका पीछा करते हुए  चौथे दिन इंग्लैण्ड की टीम 106 रनों पर तीन विकेट गँवा चुकी थी। 

इंग्लैण्ड के महान खिलाड़ियों में शुमार हो चुके जो रूट मैदान में डटे हुए थे। तभी उनका साथ देने आए हैरी ब्रूक। युवा और तेजतर्रार बल्लेबाज। आते ही उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से भारतीय गेंदबाजों की लय और दिशा बिगाड़नी शुरू कर दी। अब दबाव भारतीय गेंदबाजों पर बन चला था कि तभी प्रसिद्ध कृष्ण की एक गेंद को ब्रूक ने सीमा रेखा से बाहर भेजने की कोशिश की। गेंद सीमा रेखा पर पहुँची, मगर सीधे वहाँ क्षेत्ररक्षण कर रहे मोहम्मद सिराज के हाथों में। एक पल के लिए सभी को लगा कि ब्रूक आउट हो चुके हैं। भारत को बड़ी सफलता मिल गई है। मगर यह क्या?! गेंद पकड़ते-पकड़ते सिराज तो अपना ही सन्तुलन खो बैठे! सीमा रेखा पर पहले उनका पैर पड़ा और फिर वे खुद ही उससे बाहर चले गए। जहाँ भारत को विकेट मिलना था, वहाँ इंग्लैण्ड और ब्रूक को छह रन मिल गए। सिराज की छोटी सी यह गलती भारत के लिए बहुत बड़ी साबित होने वाली थी। 

इस एक जीवनदान के बाद ब्रूक और रूट ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैण्ड को 300 रनों के पार पहुँचा दिया। तब ऐसा लगने लगा कि अब जीत भारत के हाथों से छिटक गई है। दोनों बल्लेबाज अपना शतक बना चुके थे और इधर भारतीय खिलाड़ियों में हताशा साफ झलकने लगी थी कि तभी ब्रूक और फिर 36 रनों के भीतर रूट सहित दो खिलाड़ी और आउट हो गए। भारतीय टीम में जान लौट आई। लेकिन अभी खतरा टला नहीं था। इंग्लैण्ड को जीत के लिए 35 रन ही चाहिए थे। उसके चार बल्लेबाज बचे थे। ऐसे में फिर आशंका बनी कि सिराज की किस्मत (ब्रूक को जीवनदान मिलने के मामले में) कहीं भारत की हार का कारण न बन जाए! 

लेकिन नहीं, ऊपरवाला उन्हें खलनायक नहीं बल्कि नायक बनाना चाहता था। उन्हें अपनी गलती सुधारने का मौका देना चाहता था। सो, अचानक मौसम बिगड़ा। रोशनी कम हुई और खेल अगले दिन पर चला गया। सिराज काे समय मिला और उन्होंने खुद से कहा, “मुझसे गलती हुई है, मैं ही ठीक करूँगा। मैं टीम को मैच जिता सकता हूँ। इसके लिए लिए मैं अपना सब कुछ झोंक दूँगा।” और उन्होंने अगले दिन यही किया भी। सधी हुई सटीक गेंदबाजी से इंग्लैण्ड के बल्लेबाजों को हाथ खोलने और रन बनाने का मौका ही नहीं दिया। दूसरी तरफ से प्रसिद्ध कृष्ण ने भी उनका पूरा साथ निभाया। बेहद रोमांचक मुकाबले में दोनों ने मिलकर देखते ही देखते इंग्लैण्ड के तीन बल्लेबाजों को मैदान के बाहर का रास्ता दिखा दिया। और फिर जब इंग्लैण्ड को जीत के लिए महज सात रन चाहिए थे, सिराज ने सटीक यॉर्कर से आखिरी बल्लेबाज को भी घुटनों पर ला दिया। भारत ने टेस्ट क्रिकेट के अपने इतिहास में सबसे छोटी जीत (छह रन से) हसिल की। इसके नायक बने मोहम्मद सिराज, जिन्होंने मैच में पाँच विकेट लिए। 

है न ‘रोचक-सोचक’ कहानी? इंसान, उसका समय और उसकी किस्मत की कहानियाँ ऐसी ही होती हैं।

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Neelesh Dwivedi

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