इण्डिगो संकट : क्या भारत सरकार अब वन्दे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के बारे में सोचेगी?

निकेश जैन, इन्दौर मध्य प्रदेश

देश में अभी हाल ही में उपजे ‘इण्डिगो संकट’ ने लोगों को ट्रेनों, बसों और निजी कारों की तरफ मुड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। मुझे खुद इन्दौर से पुणे और मुम्बई जाना था। लेकिन मैं इण्डिगो की उड़ान से टिकट लेने की हिम्मत नहीं कर पाया। वे लोग पता नहीं कब, किसके टिकट रद्द कर दें? क्या मालूम उनका विमान उड़ान भरेगा भी या नहीं? ऐसे तमाम सवाल मेरे दिमाग में भी आए।

यही नहीं, मुझे कोरोना महामारी का दौर भी याद आ गया। तब भी ऐसी ही अनिश्चितता की स्थिति बनी थी। मुझे इन्दौर से बेंगलुरू जाना था। तालाबन्दी (लॉकडाउन) के ठीक एक दिन पहले की बात है यह। उस वक्त मैं सीधे हवाई अड्‌डे पर पहुँचा था और वहाँ जाकर सब तरह की तस्दीक करने के बाद अपना टिकट लिया था। तब मैंने पहले ही पूछ लिया था कि भाई, उड़ान रवाना होगी या नहीं? 

वैसे, मैं निरंतर और नियमित रूप से इण्डिगो से ही हवाई यात्राएँ करता हूँ। इसकी सेवाएँ भी मुझे ठीक लगती हैं। लेकिन सच कहूँ तो यह एयरलाइंस कुछ तरह का संकट पैदा करेगी, यह मैंने भी नहीं सोचा था। मेरे कल्पना से भी ऊपर की स्थिति है यह। यह स्थिति सरकार के जिस आदेश (पायलटों को निश्चित घण्टों का काम और आराम देने से सम्बन्धित) के कारण बनी बताई जाती है, उसे कुछ समय के लिए वापस ले लिया गया। फिर भी इण्डिगो की उड़ानों का हिसाब अब तक ठीक नहीं हो पाया है। स्पष्ट है कि मसला बड़ा है।  

इससे यह भी साफ हो गया है कि हम सिर्फ एक एयरलाइन के भरोस नहीं रह सकते। पूरे विमानन सेवा बाजार पर एक एयरलाइन के आधिपत्य जैसी स्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकते। सरकार को यह स्थिति सन्तुलित करने के लिए कुछ तो करना ही होगा। वह ऐसी व्यवस्था कर सकती है कि अधिक से अधिक कम्पनियाँ भारत के घरेलू विमानन सेवा बाजार में उतरें। ताकि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक स्थिति सुनिश्चित हो सके। एक और काम वन्दे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का हो सकता है।

अगर हमारे पास 600 किलोमीटर की दूरी वाले शहरों के बीच नियमित रूप से वन्दे भारत ट्रेनों की उपलब्ध्ता हो, तो कई लोग उड़ानों की जगह ट्रेन से जाना पसन्द करेंगे। इसका कारण है। इन्दौर और पुणे के बीच का ही उदाहरण लेते हैं। अगर हवाई जहाज से जाया जाए, तो घर से अपने गन्तव्य तक पहुंचने का पूरा समय लगभग सात घण्टे का होता है। वन्दे भारत से यह दूरी लगभग आठ घण्टे में तय होती है। क्या बुराई है इसमें? जबकि आपका पैसा भी उड़ान की तुलना में वन्दे भारत से जाने पर बच जाता है।

उम्मीद है सरकार इन विकल्पों पर ध्यान देगी और वन्दे भारत ट्रेनों की संख्या तथा गति बढ़ाने पर विचार करेगी।

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सूचना : लगातार आठवें दिन मंगलवार, 9 दिसम्बर को इण्डिगो की देशभर में लगभग 400 उड़ानें रद्द हुई हैं। जब से इण्डिगो संकट शुरू हुआ है, तब से अब तक लगभग 5,000 उड़ानें रद्द की गई हैं, ऐसा अनुमान है। इसके बाद सरकार ने इण्डिगो पर सख्त कार्रवाई करते हुए उसकी तयशुदा उड़ानों की संख्या 10 प्रतिशत तक कम कर दी है। 

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निकेश का मूल लेख

Indigo fiasco has moved people to Trains, Buses and personal Cars!

I need to travel to Pune/Mumbai from Indore and I can’t dare book Indigo flight. They are canceling on random basis so no idea if plane will take off or not.

Feels like initial days of covid. I recall – for my Indore-Bangalore journey a day before lock down I reached Indore airport and bought my ticket at the counter after confirming that flight would take off!!

I am a frequent flyer of Indigo and in general I like their services. But this goof up from them is beyond my comprehension. The DGCA has withdrawn the roaster requirements but still their schedule is not stabilizing.

Clearly, there is a a bigger underlying issue.

We can’t have one big airlines dominate the market like this. Government needs to build some balance here.

If we had a regular Vande Bharat train service between cities that are at around 600KM distance then also we could call it an alternative to flights. If I could reach Pune in 8 hours by train it’s almost as good as taking a flight (door to door is almost 7 hours for a flight).

I hope government will use this fiasco as a learning opportunity and will roll out Vande Bharat services faster.

Thoughts? 

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(निकेश जैन, कॉरपोरेट प्रशिक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी- एड्यूरिगो टेक्नोलॉजी के सह-संस्थापक हैं। उनकी अनुमति से उनका यह लेख अपेक्षित संशोधनों और भाषायी बदलावों के साथ #अपनीडिजिटलडायरी पर लिया गया है। मूल रूप से अंग्रेजी में उन्होंने इसे लिंक्डइन पर लिखा है।)

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