“हाँ! तुम्हारी बहन ने मुझे यह भेंट दी थीं,” फिर कुछ ठहर कर बोली, “और ये चाँदी की पायल भी। मुझे हमेशा पता होता है…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : मुझे अपना ख्याल रखने के लिए किसी ‘डायन’ की जरूरत नहीं!Author: Neelesh Dwivedi
‘मायावी अंबा और शैतान’ : वह उस दिशा में बढ़ रहा है, जहाँ मौत निश्चित है!
नकुल जानता था कि वह बागियों के दल में सक्रिय सदस्य के तौर पर शामिल होने के लिए कभी पूरी तरह तैयार नहीं था। अभी…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : वह उस दिशा में बढ़ रहा है, जहाँ मौत निश्चित है!प्रकृति की विनाश-लीला अस्ल में हमारी विकास-लीला का ज़वाब है, चेत जाइए!
आज, 11 जुलाई को पूरी दुनिया में ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया गया। भारत में इस बार यह अवसर दो अर्थों में ख़ास रहा। पहला- इसलिए…
View More प्रकृति की विनाश-लीला अस्ल में हमारी विकास-लीला का ज़वाब है, चेत जाइए!‘मायावी अंबा और शैतान’ : सुअरों की तरह हम मार दिए जाने वाले हैं!
कुछ मर्दों के सीने में न, जैसे कोई किरच होती है। इससे उनका दिल ऐसे ठंडा हो जाता है, जैसे बर्फ का लौंदा। लेकिन तारा…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : सुअरों की तरह हम मार दिए जाने वाले हैं!‘दिल्ली रोबोटिक्स लीग’ : स्कूली बच्चों के लिए एक सरकारी आयोजन… कभी, कहीं सुना है?
शिक्षा या ज्ञान मानव जीवन में हासिल की जाने वाली सबसे उत्कृष्ट और सबसे अद्भुत चीज है। अगर मानव को शिक्षित होने का अवसर मिल…
View More ‘दिल्ली रोबोटिक्स लीग’ : स्कूली बच्चों के लिए एक सरकारी आयोजन… कभी, कहीं सुना है?‘मायावी अंबा और शैतान’ : बुढ़िया, तूने उस कलंकिनी का नाम लेने की हिम्मत कैसे की!
……“तुम इस बच्ची के भीतर क्यों हो?” ओझन ने हम से सवाल किया लेकिन उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि हम उसे जवाब…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : बुढ़िया, तूने उस कलंकिनी का नाम लेने की हिम्मत कैसे की!फिनलैंड ने फिर बताया कि वह दुनिया में सबसे ज़्यादा ख़ुश कैसे रहता है
फिनलैंड। दुनिया का सबसे ख़ुशहाल मुल्क। छोटा सा देश है। आबादी दिल्ली के मुक़ाबले आधे से भी कम। महज़ 55-56 लाख के आस-पास। इसके बावजूद…
View More फिनलैंड ने फिर बताया कि वह दुनिया में सबसे ज़्यादा ख़ुश कैसे रहता है‘मायावी अंबा और शैतान’ : “मर जाने दो इसे”, ये पहले शब्द थे, जो उसके लिए निकाले गए
# उसे # “मर जाने दो उसे”, ये पहले शब्द थे, जो जन्म के समय उसके लिए निकाले गए। हमें पता है क्योंकि हम वहीं…
View More ‘मायावी अंबा और शैतान’ : “मर जाने दो इसे”, ये पहले शब्द थे, जो उसके लिए निकाले गए‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती है
छूटने से ऐन पहले लोकल को किसी तरह दौड़ते-भागते पकड़ लेना, टूटती साँस की डोर को थाम लेने जैसा आभास कराता है। ये लक्ष्य तय…
View More ‘लोकल’ बहुत सारी चीज़ें सिखाती है, ज़िन्दगी के फ़लसफ़े बताती हैगुरु की सीख : नीयत भले जल्द बदल जाए, पर वक़्त के साथ नियति भी बदल ही जाती है
उस रोज़ संगीत दिवस था। तारीख इसी 21 जून की। एक घटना ऐसी हुई कि मुझे महाभारत का एकलव्य-द्रोण-अर्जुन प्रसंग फिर याद आ गया। ऐसी…
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